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Ganesh Aarti Lyrics in Hindi Ganesh Ji Ki Aarti in Hindi गणेश जी की आरती

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ganesh aarti lyrics in hindi – Ganesh Ji Ki Aarti in Hindi – ganesh aarti lyrics in hindi – Ganesh Ji Ki Aarti in Hindi

  • गणेश जी की आरती – Ganesh Ji Ki Aarti in Hindi – ganesh aarti lyrics in hindi

  • जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा – jai ganesh jai ganesh deva

  • जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
    माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…
    एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
    माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय…
    अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
    बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…
    पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
    लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…
    ‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
    जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥
  • Jay Ganesh, Jay Ganesh, Jay Ganesh Deva |
    Maata Jaki Parvati, Pita Mahadeva ||
    Ek Dant Dayavant, Char Bhujadharii |
    Mathe Par Tilak Sohe, Muse Ki Savari ||
    Pan Cadhe, Phul Caddhe Aur Caddhe Mewa |
    Ladduan Ka Bhog Lage, Sant Kare Seva ||
    Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaya |
    Banjhan Ko Putra Det, Nirdhan Ko Maya ||
    Surashyam Sharan Aaye Safal Kije Seva |
    Mata Jakii Parvatii, Pita Mahadeva ||
    Jay Ganesh, Jay Ganesh, Jay Ganesh Deva ||
  • गणेश जी को लड्डू और दूब की घास जरुर चढ़ानी चाहिए. हर बुद्धवार को गणेश जी की पूजा जरुर करनी चाहिए. अगर आपकी शादी होने में दिक्कत हो रही हो, तो हर बुद्धवार को आपको गणेश जी की पूजा जरुर करनी चाहिए. उन्हें हल्दी, लड्डू और दूब की घास ( दूर्वा ) जरुर चढ़ानी चाहिए. और आपको उस दिन के मीठा भोजन हीं ग्रहण करना चाहिए. सामान्य पूजा की तरह बाकि चीजें करनी चाहिए और अंत में उनकी आरती जरुर करनी चाहिए.
  • आरती गजवदन विनायक की aarti gajvadan vinayak ki

  • आरती गजवदन विनायक की।
    सुर मुनि-पूजित गणनायक की॥ आरती….
    एकदंत, शशिभाल, गजानन,
    विघ्नविनाशक, शुभगुण कानन
    शिवसुत, वन्द्यमान-चतुरानन,
    दु:खविनाशक, सुखदायक की॥ आरती…
    ऋद्धि-सिद्धि स्वामी समर्थ अति,
    विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति,
    अघ-वन-दहन, अमल अविगत गति,
    विद्या, विनय-विभव दायक की॥आरती….
    पिंगलनयन, विशाल शुंडधर,
    धूम्रवर्ण, शुचि वज्रांकुश-कर,
    लम्बोदर, बाधा-विपत्ति-हर,
    सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥आरती….
  • गणपति की सेवा मंगल मेवा – ganpati ki seva mangal meva

  • गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विध्न टरै।
    तीन लोक तैंतीस देवता, द्वार खड़े सब अर्ज करें॥
    ऋद्धि-सिद्धि दक्षिण वाम विराजे, अरु आनन्द सों चमर करें।
    धूप दीप और लिए आरती, भक्त खड़े जयकार करें॥
    गुड़ के मोदक भोग लगत हैं, मूषक वाहन चढ़ा सरें।
    सौम्यरुप सेवा गणपति की, विध्न भागजा दूर परें॥
    भादों मास और शुक्ल चतुर्थी, दिन दोपारा पूर परें ।
    लियो जन्म गणपति प्रभुजी सुनी दुर्गा मन आनन्द भरें॥
    अद्भुत बाजा बज्या इन्द्र का, देव वधू जहँ गान करें।
    श्री शंकर के आनन्द उपज्यो, नाम सुन्या सब विघ्न टरें॥
    आन विधाता बैठे आसन, इन्द्र अप्सरा नृत्य करें।
    देख वेद ब्रह्माजी जाको, विघ्नविनाशक नाम धरें॥
    एकदन्त गजवदन विनायक, त्रिनयन रूप अनूप धरें।
    पगथंभा सा उदर पुष्ट है, देख चन्द्रमा हास्य करें॥
    दे श्राप श्री चंद्रदेव को, कलाहीन तत्काल करें।
    चौदह लोक मे फिरे गणपति, तीन भुवन में राज्य करें॥
    उठ प्रभात जब करे ध्यान कोई ताके कारज सर्व सरें|
    पूजा काले गाव आरती ताके शिर यश छत्र फिरें||
    गणपति की पूजा पहले करनी, काम सभी निर्विघ्न सरें।
    श्री प्रताप गणपतीजी को, हाथ जोड स्तुति करें॥
    गणपति की सेवा मंगल मेवा, सेवा से सब विध्न टरें||
  • श्री गणपति भज प्रगट पार्वती

  • श्री गणपति भज प्रगट पार्वती,
    अंक विराजत अविनासी।
    ब्रह्मा विष्णु सिवादि सकल सुर,
    करत आरती उल्लासी॥
    त्रिशूल धर को भाग्य मानिकै,
    सब जुरि आये कैलासी।
    करत ध्यान, गन्धर्व गान-रत,
    पुष्पन की हो वर्षा-सी॥
    धनि भवानी व्रत साधि लह्यो जिन,
    पुत्र परम गोलोकासी।
    अचल अनादि अखंड परात्पर,
    भक्तहेतु भव परकासी॥
    विद्या बुद्धि निधान गुनाकर,
    विघ्नविनासन दुखनासी।
    तुष्टि पुष्टि सुभ लाभ लक्ष्मी संग,
    रिद्धि सिद्धि सी हैं दासी॥
    सब कारज जग होत सिद्ध सुभ,
    द्वादस नाम कहे छासी।
    कामधेनु चिंतामनि सुरतरु,
    चार पदारथ देतासी॥
    गज आनन सुभ सदन रदन इक,
    सुंढि ढूंढि पुर पूजा सी।
    चार भुजा मोदक करतल सजि,
    अंकुस धारत फरसा सी॥
    ब्याल सूत्र त्रयनेत्र भाल ससि,
    उदरवाहन सुखरासी।
    जिनके सुमिरन सेवन करते,
    टूट जात जम की फांसी॥
    कृष्णपाल धरि ध्यान निरन्तर,
    मन लगाये जो कोई गासी।
    दूर करैं भव की बाधा प्रभु,
    मुक्ति जन्म निजपद पासी॥
  • Jai Dev Jai Mangal Murti

  • जय देव, जय देव, जय मंगलमूर्ती
    दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति
    सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
    नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची॥
    सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
    कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥ जय देव, जय देव
    रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा।
    चंदनाची उटी कुंकुम केशरा।
    हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा।
    रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥ जय देव, जय देव
    लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना।
    सरळ सोंड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
    दास रामाचा वाट पाहे सदना।
    संकटी पावावें, निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥
  • jai jai ji ganraj vidya sukh data lyrics

  • जय जय जी गणराज विद्या सुखदाता।
    धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता
    शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको।
    दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरि-हर को।
    हाथ लिए गुड-लड्डू सांई सुरवर को।
    महिमा कहे न जाय लागत हूँ पद को|| जय देव, जय देव
    अष्टौ सिद्धि दासी संकट को बैरि।
    विघ्न विनाशन मंगल मूरत अधिकारी।
    कोटी सूरज प्रकाश ऐसी छबि तेरी।
    गंडस्थल मदमस्तक झूले शशि-बहारि || जय देव, जय देव
    भाव-भगति से कोई शरणागत आवे।
    संतत संपत सब ही भरपूर पावे।
    ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।
    गोसावीनंदन निशि-दिन गुन गावे॥ जय देव, जय देव
  • गणेश जी के कुछ मंत्र Ganesh ji Manta in Hindi

  • वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
    निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा
  • श्री गणेश बीज मंत्र – ऊँ गं गणपतये नमः ।।
  • एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
    महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
    गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्।।
  • गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
    द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
    विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
    द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌॥
    विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌।