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मोहम्मद युनुस Muhammad Yunus Quotes in Hindi

हम आपके लिए लाये हैं “Muhammad Yunus Quotes in Hindi” आशा करता हूँ की ये आपको जरूर पसंद आएँगी

 

Muhammad Yunus Quotes in Hindi (1)
Muhammad Yunus Quotes in Hindi

 

अच्छी शिक्षा तक पहुँच ने मुझे उस बांग्लादेशी गाँव ,जहाँ मैं बड़ा हुआ था, से कहीं आगे जाने में सक्षम बना दिया।


माइक्रोक्रेडिट ने दिखा दिया है की कैसे आप उन लोगों तक पहुँच सकते हैं जहाँ पारंपरिक बैंकिंग नहीं पहुँच सकती। इसने साबित कर दिया है कि ऐसा किया जा सकता है।


मनुष्यों में भारी लचीलापन है .


सभ्यता ने हमें भारी सफलताएं दी हैं : चंद्रमा पे जाने की प्रौद्योगिकी। लेकिन इसी सभ्यता ने हमें ऋण, पर्यावरण संकट, और कई तरह के संकट में डाला है। हमें ऐसी सभ्यता की ज़रुरत है जहाँ हम इन चीजों को अलविदा कह सकेँ।


बांग्लादेश में मैं जिस हालात में काम कर रहा था , मुझे बिलकुल भी पता नहीं था कि मैं कभी गरीबों को पैसे उधार देने जैसी चीज में शामिल होऊंगा .


पैसा पैसे को खींचता है। अगर वो आपके पास नहीं है , आप किसे और की दया पर रह रहे व्यक्ति द्वारा काम पर रखे जाने का इंतज़ार करते हैं। अगर आपके हाथ में पैसा है , आप उसका सबसे अच्छा उपयोग कर के आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। और वो आपके लिए आय पैदा करता है।


असीमित मानव रचनात्मकता के साथ बेजोड़ तकनीकी क्षमता ने हमें गरीबी, बेरोजगारी, बीमारी, और पर्यावरण क्षरण जैसी गंभीर समस्याओं से लड़ने की जबरदस्त शक्ति दे दी है . इस असाधारण क्षमता को सार्थक परिवर्तन में बदलना हमारी चुनौती है .


मनुष्य सिर्फ पैसा कमाने से कहीं बढ़कर हैं।


मैंने ऐसे लोगों की लिस्ट बनायीं जिन्हे बस थोड़े से पैसों की ज़रुरत थी। और जब वो पूरी हो गयी तो उसमे ४२ नाम थे। उन्हें जो कुल पैसों की आवश्यकता थी वो थी २७ डॉलर। मैं हैरान रह गया।


गरीबी इंसानो पर एक बाहरी, कृत्रिम थोपी हुई चीज है ; यह मनुष्यों में जन्मजात नहीं है। और चूँकि ये बाहरी है , इसे हटाया जा सकता है। बस ऐसा करने का सवाल है।


एक तरफ स्वार्थ की अभिव्यक्ति है और एक तरफ निस्वार्थता की अभिव्यक्ति है – लेकिन अर्थशास्त्रियों या थेओरेटीशन्स ने वह हिस्सा कभी नहीं छुआ. उन्होंने कहा, ‘जाओ और परोपकारी बन जाओ .’ मैंने कहा , ‘नहीं, मैं व्यापार जगत में ऐसा कर सकता हूँ , एक अलग तरह के व्यापार का निर्माण कर सकता हूँ – निस्वार्थता पर आधारित एक व्यापार’ .


सभी मनुष्य जन्मजात उद्यमी होते हैं। कुछ को यह क्षमता दिखाने का मौका मिलता है। कुछ को कभी नहीं मिलता , कभी नहीं पता चला की इसमें या उसमे ये क्षमता है।


आज, अगर आप विश्व भर के फाइनेंसियल सिस्टम्स पर नज़र डालें तो दुनिया की आधे से अधिक आबादी -छह अरब लोगों में से तीन अरब से भी अधिक लोग – किसी बैंक से कर्ज लेने के लिए योग्य नहीं हैं। यह शर्म की बात है।


जल्द ही हमने देखा कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को दिया जा रहा पैसा परिवार के लिए अधिक फायदेमंद रह रहा है। इसलिए हमने अपनी नीति बदली और महिलाओं को उच्च प्राथमिकता देने लगे। नतीजतन , अब ग्रामीण बैंक ४० लाख उधारकर्ताओं में से ९६% महिलाएं हैं।


मेरी सबसे बड़ी चुनौती लोगों की मानसिकता बदलना रही है. मानसिकता हम पर अजीब चालें खेलती है। हम चीजों को उस तरह से देखते हैं जिस तरह हमारे दिमाग ने हमारी आँखों को देखने का निर्देश दिया है।


जहाँ प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण है वहीँ वास्तव में मायने ये रखता है कि हम इसका करते क्या हैं।


पैसा बनाना एक खुशी है। और यह एक बहुत बड़ा प्रोत्साहन है। अन्य लोगों को खुश करना बहुत बड़ी खुशी है।


सिर्फ अपनी प्रमुख शक्ति और ज्ञान का प्रयोग कर के , कंपनिया और उद्यमी एक उभरते बिज़नेस -मॉडल में लग सकते हैं जो उन्हें समाज पर एक वास्तविक एवं स्थायी प्रभाव डालने में समर्थ बना सकता है .


गरीबी और हमारे समाज में आर्थिक संकट की खामियों को दूर करने के लिए, हमें अपने सामाजिक जीवन की कल्पना करने की जरूरत है.हमें अपना दिमाग खोलना होगा, वो सोचना होगा जो कभी नहीं सोचा गया और एक सामाजिक उपन्यास लिखना होगा.हमें चीजों को करने के लिए उनकी कल्पना करनी होगी.अगर आप कल्पना नहीं करेंगे तो वो कभी नहीं होंगी।


व्यापार समस्याओं को हल करने की बहुत सुंदर व्यवस्था है, लेकिन हम उस उद्देश्य के लिए इसका इस्तेमाल कभी नहीं करते। हम केवल पैसे बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। यह हमारे स्वार्थ को तो संतुष्ट करता है लेकिन सामूहिक हित को नहीं।


अच्छे आर्थिक सिद्धांतों को लोगों को अपनी प्रतिभा का प्रयोग करके अपने जीवन का निर्माण करने का मौका देना चाहिए.हमे परम्परागत रास्ते जहाँ अमीर व्यवसाय करेंगे और गरीब निजी या सार्वजानिक दान पर निर्भर रहेंगे से दूर हटना होगा।


गरीबी सभी मानव अधिकारों की अनुपस्थिति के समान है। घोर गरीबी से उत्पन्न कुंठा, दुश्मनी और क्रोध किसी भी समाज में शांति बने रहने नहीं दे सकते।


मैं बैंक गया और गरीबों को ऋण देने का प्रस्ताव रखा . बैंकर्स लगभग गिर ही गए .


मेरे अनुभव में, गरीब दुनिया के सबसे बड़ी उद्यमी हैं। हर दिन, जीवित रहने के लिए उन्हें कुछ नया करना पड़ता है। वे गरीब रह जाते हैं क्योंकि उनके पास अपनी रचनात्मकता को स्थायी आय में बदलने के अवसर नहीं मिलते।


मैं इस महिला जैसे लोगों को पैसे देना चाहता था ताकि वे साहूकारों से मुक्त हो कर अपने उत्पाद बाज़ार भाव पर बेंच सकें – जो की जितना व्यापारी दे रहा था उससे कहीं अधिक था।


हम एक गलत पूंजीवादी व्यवस्था बना ली है। हम मनुष्य को एक आयामी मानते हैं , हम मानते हैं कि वे बस पैसा बनाते हैं , इसीलिए हमने पैसों पर केंद्रित एक दुनिया बना ली है।


खूब जियो ग्रामीण बैंक। गरीब महिलाओं की शक्ति प्रबल रहे।

 

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