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“चारमीनार का इतिहास” (History of Charminar in Hindi)

भारत देश प्राचीन धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ कई प्रकार के महल और इमारते पाई जाती है जिनमे से एक है चारमीनार की ईमारत. यह एक ऐतिहासिक स्मारक है। इस ईमारत का निर्माण 1591 ई. में हैदराबाद में हुआ था। भारत के तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में बनी यह ईमारत एक मस्जिद है। वर्तमान में यह स्मारक हैदराबाद की वैश्विक धरोहर बनी हुई है और साथ ही चारमीनार भारत के मुख्य स्मारकों में भी शामिल है। 2 मई 2019 को चारमीनार की खराब हालत की वजह से इसका एक हिस्से को नुकसान हुआ है.

चारमीनार का इतिहास:-

चारमीनार का निर्माण मुसी नदी के पूर्वी तट पर किया गया है। चारमीनार के बायीं तरफ लाड बाज़ार और दक्षिण तरफ मक्का मस्जिद है।चारमीनार का इंग्लिश नाम उर्दू शब्द चार और मीनार के रूपांतर से बना हुआ है, इसका इंग्लिश नाम “फोर टावर” है। कुतब शाही साम्राज्य के पाँचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में चारमीनार को बनवाया था। अपनी राजधानी गोलकोंडा को हैदराबाद में स्थानान्तरित करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में चारमीनार का निर्माण करवाया। चारमीनार के वजह से आज हैदराबाद को वैश्विक पहचान मिली है। चारमीनार पर इतिहास में कई पौराणिक कथाये है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) के अनुसार,लोगो का यह मानना है प्लेग की बीमारी का संक्रमण रोकने के लिये चारमीनार को शहर के मध्य में बनाया गया है।”उस समय यह एक गंभीर बीमारी थी, जिससे इंसान मर भी सकता था। कहा जाता है की मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने यह मस्जिद बनवाकर यहाँ प्रार्थना की थी।17 वी शताब्दी के एक फ्रेंच यात्री जीन दे थेवेनोट के अनुसार चारमीनार का निर्माण 1591 CE में किया गया था, मतलब दुसरे इस्लामिक सहस्त्र वर्ष (1000AH) में किया गया था। इस्लामिक देशो में इसे एक पर्व के रूप में मनाया जाता है, इसीलिये कुतुब शाह ने पर्व को मनाने के लिये हैदराबाद शहर का चुनाव किया और वहा चारमीनार का निर्माण किया गया। किताब “डेज ऑफ़ द बीलव्ड” के अनुसार कुतुब शाह ने 1589 में चारमीनार का निर्माणकार्य शुरू किया था, इसका निर्माण उन्होंने उसी जगह पर किया था जहा उन्होंने अपनी भविष्य की रानी भागमती को पहली बार देखा था और रानी के इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के बाद उन्होंने शहर का नाम हैदराबाद रखा था। इस कहानी को इतिहासकारों और विद्वानों ने झूटी बताया था, लेकिन स्थानिक लोगो का इस कहानी पर काफी विश्वास था।

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ईमारत की संरचना:-

यह स्मारक ग्रेनाइट, चूना पत्थर, मोर्टार और चूर्णित संगमरमर से बना है। ईमारत के प्रत्येक कोने पर एक उत्कृष्ट आकार मीनार, 56 मीटर (लगभग 184 फुट) एक डबल छज्जे के साथ उच्च खड़ा है। प्रत्येक मीनार आधार पर डिजाइन की तरह मिठाइयां पत्ती के साथ एक बल्बनुमा गुंबद द्वारा ताज पहनाया है।उसमे 149 घुमावदार कदम ऊपरी मंजिल तक पहुँचने हैं। ऊपर सुंदर इंटीरियर के एकांत और शांति ताज़ा है। मीनारों के बीच ऊपरी मंजिल का निर्माण  शुक्रवार की नमाज के लिए किया गया था। पैंतालीस प्रार्थना रिक्त स्थान हैं।

अन्य जानकारी:-

 

कहा जाता है की चारमीनार की चार मीनारे इस्लाम के पहले चार खलीफो का प्रतिक है।

असल में मस्जिद चारमीनार के सबसे उपरी मंजिल पर बनी हुई है।

चारो मीनारों को एक विशिष्ट रिंग से चिन्हित किया गया है जिसे हम बाहर से देख सकते है।

चारमीनार में पत्थरो की बालकनी के साथ ही एक छत और दो गैलरी भी है जो छत की तरह दिखाई देती है।

मीनार की हर तरफ एक बड़ा वक्र बना हुआ है जो 11 मीटर फैला और 20 मीटर ऊँचा है।

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