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“History of Civil Disobedience Movement in Hindi” (सविनय अवज्ञा आन्दोलन का इतिहास हिंदी में)

“History of Civil Disobedience Movement in Hindi” (सविनय अवज्ञा आन्दोलन का इतिहास हिंदी में)
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जब भारत अंग्रेजो का गुलाम था तब देश को आजाद कराने के लिए भारत के वीरो ने कई प्रयास किये और उन्होंने कई आन्दोलन भी चलाये. उन्ही में से एक आन्दोलन था ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’. यह आन्दोलन महात्मा गाँधी ने 2  मार्च 1930 को  नमक पर ब्रिटिश सरकार के एकाधिकार के विरोध में किया था. भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़ा साहसिक कार्यक्रम था।

सविनय अवज्ञा आन्दोलन का इतिहास:-

आन्दोलन का आरंभ:-

ब्रिटिशो ने आहार में नमक एकत्र करने और बेचने से भारतीयों को प्रतिबंधित किया था और नमक पर भारी कर भी लगा दिया गया। इससे भारत के गरीबो को कर से सबसे अधिक नुकसान हुआ था क्योंकि भारतीयों को नमक की बहुत आवश्यकता थी। इसलिए गाँधी जी ने भारतीयों के लिए ब्रिटिश कानून को अहिंसक रूप से तोड़ने के लिए इस आंदोलन की शुरुआत की। इसके अलावा भी इस आन्दोलन के कई कारण थे जेसे:-

चौरा चौरी कांड के चलते उस वक़्त चल रहे असहयोग आंदोलन को अचानक बंद कर दिया गया था. असहयोग आंदोलन तब तक का सबसे सफल आंदोलन माना जा रहा था . यह आन्दोलन बंद होने के बाद कई लोगों के अंदर गाँधी जी के प्रति आक्रोश था, जिसे दूर करने के लिए सविनय अवज्ञा आंदोलन लाया गया.

1929 में भारत देश की आर्थिक व्यवस्था भी ख़राब होती जा रही थी, मंदी को ध्यान में रखते हुए इस आंदोलन को लाने की योजना बनाई गई.

साइमन कमीशन के खिलाफ चले आंदोलन में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था, लोगों में क्रांति की लहर फ़ैल गई थी, इसी को देखते हुए राष्ट्रीय कांग्रेस कमिटी को लगा कि जनता को इस आंदोलन से जोड़ा जाये।

दांडी यात्रा:-

सविनय अवज्ञा आंदोलन की औपचारिक घोषणा 6 अप्रैल 1930 को गाँधी जी के नेतृत्व में हुई थी. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाये गए कानून को तोड़ना और उनकी बात की अवहेलना करना था. 12 मार्च को, गाँधी जी  78 अनुयायियों के साथ साबरमती से  अरब सागर के तटीय शहर दांडी के लिये 241 मील की यात्रा पर निकल पड़े। जेसे-जेसे वह आगे बढ़ते गये उनके साथ कई और लोग शामिल हो गये. जब वह 5 अप्रैल को दांडी पहुंचे  तो उस समय गांधीजी सविनय अवज्ञा आंदोलन में हजारों लोगों मुखिया थे। गांधीजी ने सभी सदस्यों के साथ मिलकर अगली सुबह समुद्र पर नमक बनाया और ब्रिटिश नमक कानून को तोड़ा। उन्होंने समुद्र तट की समतल भूमि पर नमक  बनाया लेकिन पुलिस ने बने हुए नमक को समुद्र में फेक दिया। फिर भी, गांधी जी नीचे पहुंचे और मिट्टी से प्राकृतिक नमक का एक छोटा गांठ बाहर उठाया और ब्रिटिश नमक कानून की अवहेलना की।

इसके परिणामस्वरूप, भारतीय राष्ट्रवादियों में नमक बनाने के लिये नागरिकों की भीड़ उमड़ पड़ी। सविनय अवज्ञा पूरे भारत में फैल गया, जल्द ही इसमें लाखों भारतीयों शामिल हो गये  और तब ब्रिटिश अधिकारियों ने 60,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर लिया। ब्रिटिश पुलिस द्वारा, 5 मई को गाँधी की को भी गिरफ्तार कर लिया गया. लेकिन  सत्याग्रह उनके बिना भी चरम सीमा पर था। जनवरी 1931 में, गांधी को जेल से रिहा किया गया था। बाद में, उन्होंने लॉर्ड इरविन के साथ मुलाकात की, भारत के भविष्य को देखते हुए लंदन सम्मेलन में बातचीत की गई और उसके बदले में सत्याग्रह को बंद करने की मांग की गई, और कुछ शर्तों के तहत गाँधी जी और इरविन समझौता हुआ।

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