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बहुभाषिक | Akbar Birbal Hindi Story

बहुभाषिक

शहंशाह अकबर और बीरबल अक्सर भेस बदल कर अपनी सल्तनत का मुआयना करते थे.

एक दिन जब वे शहर के बाजार से गुजर रहे थे तब उन्हें एक कालीन की दुकान दिखाई दी. उस दुकान पर बहुत अच्छे-अच्छे कालीन थे.

शहंशाह की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने बीरबल से कहा चलो उस दुकान वाले से कालीन के बारे में पूछते हैं.

दुकान पर जाकर उन्होंने एक कालीन पसंद किया और दुकान वाले से उसका कालीन का मूल्य पूछा.

दुकान वाले ने एक अजीब सी भाषा में उन्हें जवाब दिया.

दुकान वाले का उत्तर सुनकर अकबर और बीरबल दो ही चकित रह गए.

शहंशाह ने बीरबल से पूछा कि यह आदमी क्या कह रहा है?? यह कौन सी भाषा बोल रहा है?

बीरबल कहते हैं मैं भी नहीं समझ पा रहा हूं…

बीरबल ने दुकान वाले से पूछा हम कहना चाहते है कि आप यह नीला कालीन कितने में बेच रहे हैं?

दुकान वाले ने वापस अजीब सी भाषा में जवाब दिया.

शहंशाह कहते हैं यह क्या कह रहा है मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है. अब रुकना बेकार है चलो वापस और वे दोनों दुकान से चले जाते हैं.

अगले दिन जब बीरबल और शहंशाह शाही बाग़ में घूम रहे होते हैं तब शहंशाह कहते हैं बड़ी अजीब बात है की हम इस सल्तनत पर हुकूमत कैसे कर सकते हैं अगर हमे लोगों की भाषा ही समझ ना आए.

बीरबल ने सुझाव दिया कि क्यों ना हम एक ऐसा व्यक्ति नियुक्त करे जिसे बहुत सी भाषाओं का ज्ञान हो.

शहंशाह ने कहा बहुत ही अच्छा सुझाव है.

अगले दिन शहंशाह ने अपने मंत्रियों को बाजार में जो घटना हुई उसके बारे में बताया. साथ ही साथ यह भी बताया कि हमने अपने दरबार में एक ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करने का फैसला किया है जो की बहुत सी भाषाओं का जानकार हूं.

शहंशाह ने यह जिम्मा मानसिंह जी को सौंपा की वे किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करें.

मानसिंह जी ने कहा – हुजूर. जैसी आपकी इच्छा. हम राज्य का नाम सबसे अच्छा बहुभाषी ढूंढ कर लायेंगे और इसके लिए उन्होंने राज्य भर में एलान करवा दिया की दरबार में एक शाही बहुभाषी की जरूरत है.

कुछ दिन बाद मान सिंह जी ने एक बहुभाषी को ढूंढ लिया और उसे शहंशाह के सामने पेश किया. उस व्यक्ति ने कहा कि मैं 10 अलग अलग भाषाएं बोल सकता हूं और आपको इस काम के लिए मुझसे बेहतर व्यक्ति और कोई नहीं मिल सकता. बादशाह ने कहा ठीक है पर तुम यह बताओ कि तुम कहां के रहने वाले हो और तुम्हारी मातृभाषा क्या हैं?

उस व्यक्ति ने कहा जहांपनाह आप के दरबार में बहुत से ज्ञानी लोग उपस्थित हैं और आदमी की जुबान ही उसकी असली पहचान होती है. क्या आप के दरबार में आपके सवाल का कोई जवाब दे सकता है?

शहंशाह ने कहा ठीक है हम अपने मंत्रियों को इसका जवाब देने के लिए कहेंगे. शहंशाह ने सबसे पहले मानसिंह जी को उस बहुभाषी की मात्र भाषा पता करने के लिए कहा. उसके बाद एक एक करके सभी मंत्रियो ने उससे अपनी अपनी मात्र भाषा में उससे बात की और उस बहुभाषी ने सभी से ऐसे जवाब दिया की मानो सभी भाषाएँ उसकी मात्र भाषा हो. कोई भी उसकी मात्र भाषा का पता नहीं लगा पा रहा था.

अंत में शहंशाह ने बीरबल से पूछा- क्या बीरबल तुम इसकी मात्र भाषा के बारें में पता नहीं करना चाहोगे? तुमने अभी तक कुछ नहीं कहा.

बीरबल ने कहा: हुजुर, मुझे आप एक दिन का वक़्त दीजिये. मैं आपको इसके बारे में बता दूंगा.

बादशाह ने कहा: ठीक हैं, हमें तुम्हारे उत्तर का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा.

उसी रात जब वह बहुभाषी आदमी सो रहा था तब उसे कुछ अजीब सी आवाज़ सुनाई दी. इससे उसकी नींद खुल गयीं. आवाज़ बंद होने पर वह वापस सो गया. परन्तु कुछ देर बाद वह आवाज़ वापिस आयीं. फिर उसकी नींद खुल गयीं. ऐसा बहुत बार होने पर वह बहुभाषी आदमी खिड़की पर आया और अपनी मात्र भाषा में आवाज़ करने वाले को जोर जोर से डांटने लगा.

उसके बाद वह आवाज़ आना बंद हो गयीं.

अगले दिन सभी लोग दरबार में उपस्तिथ थे. शहंशाह ने बीरबल से पूछा : क्या तुमने हमारे प्रश्न का उत्तर पता लगा लिया हैं.

बीरबल ने कहा की मैंने आपके प्रश्न का उत्तर पता लगा लिया हैं, जहांपनाह. इस व्यक्ति की मात्र भाषा बांगला हैं.

यह सुनकर वह व्यक्ति भोचक्का रह गया.

शहंशाह ने उससे पूछा की क्या बीरबल सही कह रहे हैं?

उसने कहा जी हैं वे सही कह रहे हैं.

शहनशाह ने बीरबल की पूछा की तुमने इसकी मात्र भाषा की जानकारी कैसे पायीं?

बीरबल ने बताया की कल रात जब ये सो रहे थे तो मैंने अपने नोकर को इनके कमरे के बाहर जा कर जोर जोर से आवाज़ करने को कहा. बहुत बार प्रयास करने के बाद ये बाहर आयें और जोर जोर से चिल्लाने लगे. डर, आश्चर्य, और गुस्से के वक़्त इन्सान हमेशा अपनी मात्र भाषा का इस्तेमाल करता हैं. इसलिए जब मैंने उन्हें बंगला में चिल्लाते हुए सुना तब मैंने ये गुत्थी सुलझा ली. मैंने कल रात इनकी निंद ख़राब करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

यह सब सुनकर उस व्यक्ति और शहंशाह ने बीरबल की खूब प्रशंसा की.

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