आपको अकबर बीरबल की कहानियो का हिंदी ट्रांसलेशन Akbar Birbal Stories in Hindi जरुर पसंद आएँगी. अकबर और बीरबल की कहानियां हमें कई अच्छी ज्ञान की बातें सिखाती हैं. कहानियों के माध्यम से अच्छी बातें सीखना हमेशा लाभप्रद होता हैं. इसलिए हम लेकर आयें हैं  collection of Akbar Birbal Stories in Hindi सिर्फ आपके लिए.

Best 24 Akbar Birbal Stories in Hindi | अकबर बीरबल के रोचक किस्से

Akbar Birbal Stories in Hindi

इन कहानियों को पढने के बाद कमेंट करना न भूलें की आपको ये कहानिया कैसे लगी ताकि हम आपके लिए अच्छी अच्छी कहानिया अपने इस ब्लॉग पर पोस्ट करते रहे.

 Akbar Birbal Stories in Hindi

  1.  The List of Fools- मुर्ख लोगों की सूची – 
  2.  संत या बदमाश | Saint or Crook – Akbar Birbal Stories
  3.  तेली और कसाई – Akbar Birbal Hindi Story
  4.  कटहल का पेड़ – Akbar Birbal ki Kahani
  5.  The Magical Donkey जादुई गधा
  6.  Bull’s Milk Story | बैल का दूध | अकबर बीरबल की कहानी
  7.  A Trees Testimony | पेड़ की गवाही
  8.  बाघ की कहानी | The Tiger Story
  9.  स्वर्ग से एक आदेश | An Order From Heaven
  10.  Return From Gallows | फांसी से वापसी | 
  11.  जादुई लकड़िया – Magical Sticks – 
  12. अंधे लोग Blind People
  13.  बुद्धिमत्ता की परीक्षा – Birbal’s Test – 
  14.  आधी धूप और आधी छांव
  15.  अभागा व्यक्ति – अकबर बीरबल की कहानी
  16.  हवामहल – अकबर बीरबल नैतिक कहनियाँ
  17.  Honesty – ईमानदारी – अकबर बीरबल की नैतिक कहनियाँ
  18. जो होता है अच्छे के लिए होता है – Everything Happens for Good
  19.  छोटी रेखा | Small Line – Akbar Birbal Stories
  20.  दिए की गर्मी – Birbal Akbar Stories
  21.  बहुभाषिक | Akbar Birbal Hindi Story
  22.  The Presian Trader फारसी व्यापारी

 

(Akbar Birbal Story -1)

गधे की दाढ़ी

एक बार अकबर के एक दरबारी एक शाही नाई के पास दाढ़ी बनवाने जाते हैं. नाई दाढ़ी बना रहा होता हैं उसी समय उसकी दुकान के बाहर एक लकड़ी वाला आता है जिसका नाम लादूराम था. वह दुकान के बाहर जोर जोर से चिल्लाते हैं – लकड़ी ले लो, लकड़ी ले लो…

आवाज़ सुनकर नाई का ध्यान उस आवाज की ओर चला जाता है और गलती से वह दरबारी की आधी मूंछ काट देता है. इससे दरबारी को बहुत गुस्सा होता है और नाई को दरबारी की पूरी मूंछे काटनी पड़ती है.

नाई सोचता हैं कि लकड़ी वाले को सबक सिखाना ही पड़ेगा. वह बाहर आता है और लादूराम से उसके गधे पर पड़ी सारी लकड़ियों का भाव पूछता है.

लादूराम कहता है – आपको जो सही लगे वह दे दीजिए और अंत में सभी लकड़ियों के लिए 5 अशर्फिया देना तय होता है.

नाई कहता है – मुझे गधे पर पड़ी सारी लकड़िया चाहिए जिसमें कि गधा गाड़ी की लकड़ी भी सम्मिलित है.

लकड़ी वाला कहता है – ऐसा कैसे हो सकता है इस गाड़ी पर तो मैं अन्य लकड़ियां रखता हूं. इसे मैं आपको कैसे दे सकता हूं???

नाई कहता हैं – मैंने गधे पर पड़ी सभी लकड़ियों का मूल्य पूछा था और तुमने इसके पैसे भी ले लिए हैं अब तो तुम्हें इसे देना ही पड़ेगा. बहुत विनती करने के बाद भी जब नाई नहीं माना तो लादूराम को उसे गाड़ी सहित सारी लकड़ियां देनी पड़ी और वह गधा लेकर अपने साथ रबाना हो गया.

जब वह घर पहुंचा तो वह बहुत दुखी था. उसने सारी बात अपनी पत्नी को बताई. उसकी पत्नी ने कहा कि तुम्हें बीरबल से जाकर मिलना चाहिए. वह सभी के साथ न्याय करते हैं. लादूराम, बीरबल के पास गया और उसने सारी बात उन्हें बताई. बीरबल ने लकड़ी वाले को एक तरकीब बताई. उस तरकीब के अनुसार लादूराम फिर से उस नाई के पास गया और जोर-जोर से चिल्लाया. फिर से उसकी आवाज सुनकर नाई ने अकबर के दरबारी की आधी मूंछ काट दी और इस बार वह दरबारी और गुस्सा हो गया.

नाई अपनी दुकान से बाहर आया और लकड़ी वाले से बोला – अब क्या लेने आए हो?

लादूराम कहता है – मुझे अपने दोस्त की दाढ़ी आपसे बनवानी है.

नाई कहता है – तुम कोई शहनशाह हो जो मैं तुम्हारी बात मानूं.

लादूराम कहता हैं – मेरे मित्र की संगत बहुत ही अच्छी है. उसकी संगत में रहने से मेरे भी दिन बदल गए. पहले मैं बहुत गरीब था और अब मेरा अच्छे से गुजर बसर हो जाता है.

यह बात सुनकर नाई भी लालच में आ गया और उसने बोला – ठीक है!! मैं तुम्हारे मित्र की दाढ़ी बना दूंगा और फिर लादूराम ने उसे पैसे भी दे दिए.

अगले दिन जब नाई और लादूराम मिले तब नाई ने पूछा – बताओ तुम्हारा दोस्त कहां पर है?? तब लकड़ी वाले ने अपने गधे की ओर इशारा करते हुए कहा – वही है मेरा दोस्त.

नाई कहता हैं – तुम बेवकूफ हो? भला गधा तुम्हारा मित्र कैसे हो सकता है?

लकड़ी वाला कहता है – यही मेरा मित्र है और तुम्हें इसी की दाढ़ी बनानी है. इसी बात पर दोनों झगड़ने लग जाते हैं और मामला दरबार तक पहुंच जाता है. वे दोनों शहंशाह अकबर के दरबार में पहुंचते हैं और उनसे कहते हैं – जहांपनाह हमारी एक समस्या है जिसे आप ही सुलझा सकते हैं.

शहंशाह बीरबल को आदेश देते हैं इनकी बात सुनी जाए और उचित समाधान निकाला जाए.

लकड़ी वाला बीरबल को बताता है कि यह नाई उसके मित्र की दाढ़ी बनाने से इनकार कर रहा है.

नाई कहता है – भला कोई गधा किसी आदमी का मित्र कैसे हो सकता है?

बीरबल कहते हैं – इंसान का मित्र है तो कोई भी हो सकता है जो कि उसकी विपत्ति में काम आए.

तभी नाई कहता है लेकिन इस लकड़ी वाले ने मुझे पहले नहीं बताया था कि इसका मित्र एक गधा है.

बीरबल कहते हैं – मित्र तो मित्र होता है. वह तो कोई भी हो सकता है. चाहे वह एक आदमी हो या फिर एक पशु.

नाई कहता है – यह तो सरासर गलत है. ऐसा नहीं हो सकता.

बीरबल कहते हैं – जब एक गधा गाड़ी की लकड़ी जलाने की लकड़ी में गिनी जा सकती है तो एक गधा भी इंसान का मित्र हो सकता हैं.

यह सुनकर नाई, लादूराम और बीरबल की योजना को समझ गया और उसने कहा की मैं लादूराम को वह गाड़ी लौटने आने को तैयार हूं. मैंने उसे अभी तक नहीं जलाया है.

बीरबल कहते हैं – वह तो तुम्हें लौटानी ही होगी लेकिन उससे पहले इसके मित्र की दाड़ी बनानी होगी. बीरबल की बात सुनकर सभी दरबारी जोर-जोर से हंसने लगे और नाई का मुंह छोटा सा हो गया.


(Akbar Birbal Story -2)

घोड़े का असली मालिक कौन????

एक बार एक देश के राजा अपने मंत्रियों से चर्चा कर रहे थे. उनके मंत्री राजा को बता रहे थे कि शहंशाह अकबर के दरबार में एक बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति है जिसका नाम बीरबल है. बीरबल अपनी बुद्धिमता से सभी के साथ न्याय करते हैं और शहंशाह की कई समस्याएं सुलझाने में उनकी मदद भी करते हैं.

एक मंत्री ने कहा कि लोग कहते हैं कि वे किसान के बेटे हैं. शहंशाह अकबर जब उनसे मिले तो काफी प्रभावित हुए और बीरबल को अपना सलाहकार नियुक्त कर लिया.

तीसरे मंत्री ने कहा कि बीरबल कभी किसी को नाराज नहीं करते. वे सभी केस का सम्मान करते हैं.

बीरबल के बारे में इतना सब कुछ सुनकर राजा के मन में उत्सुकता जाग उठी और उन्होंने निश्चय किया कि वे बीरबल से जरुर मिलेंगे. एक दिन रात के समय अपने विश्वासपात्र मंत्री को अपना संपूर्ण राजपाठ संभलाकर वे आगरा की ओर निकल पड़े. रास्ते में उन्हें एक व्यक्ति मिला जो कि लंगड़ाकर चल रहा था. उसने राजा को बताया कि वह एक दूसरे देश में व्यापार करने के लिए गया था और जब वह वहां से लौट रहा था तब कुछ डाकुओं ने उस पर हमला कर दिया और उसके सारे पैसे छीन लिए. उनकी पिटाई से ही उसकी यह हालत हुई है.

राजा को उस व्यक्ति पर दया आ गई. उन्होंने कहा – क्यों ना हम यह सफर साथ मिलकर पूरा करें. वह व्यक्ति भी आगरा ही जा रहा था इसलिए राजा ने उसे भी अपने घोड़े पर बैठा लिया.

जब दोनों आगरा पहुंचे तो राजा ने उस व्यक्ति को घोड़े पर से उतरने के लिए कहा लेकिन उस व्यक्ति के मन में लालच आ गया और उसने घोड़े पर से उतरने को मना कर दिया और कहा कि यह घोड़ा तो मेरा है. मैं इस पर से नहीं उतरूंगा. राजा को यह सुनकर बहुत ही गुस्सा आया लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि बीरबल की बुद्धिमत्ता को जांचने का यही सही समय है.

राजा ने उस व्यक्ति से कहा चलो हम बीरबल के पास चलकर इस समय समस्या का समाधान पूछते हैं. अगर वे कहेंगे कि यह घोड़ा तुम्हारा है तो तुम इसे ले जा सकते हो. घोड़ा पाने के लालच में उस व्यक्ति ने भी हां कर दिया और वे दोनों राजा बीरबल के पास गए.

उन्होंने सारी बातें बीरबल को बताई. बीरबल ने कहा – आप दोनों कल सुबह आएं और घोड़े का जो असली मालिक है वह कल सुबह अस्तबल में से घोड़ा ले जाएं. वे दोनों इस बात के लिए राजी हो गए. वह दोनों ही सुबह जल्दी अस्तबल के पास पहुंचे. वहां पर शहंशाह और बीरबल पहले से ही मौजूद थे.

सबसे पहले वह व्यक्ति अस्तबल के अंदर गया और उसने देखा कि सारे घोड़े एक ही जैसे दिख रहे थे. वह उनमें से असली घोड़े को नहीं पहचान पाया. उसके बाद राजा का नंबर आया. वे अस्तबल के अंदर गए और उन्हें देखते ही उनका घोड़ा जोर-जोर से हिनहिनाने लगा. राजा भी अपने घोड़े को देखकर पहचान गए और उसे लेकर बाहर आ गए.

यह सब देख कर शहंशाह ने बीरबल से पूछा – बीरबल, यह दूसरा व्यक्ति अपने घोड़े को कैसे पहचान गया जबकि सारे घोड़े एक जैसे थे?

तब बीरबल ने कहा – जहापनाह, जब कोई पशु और इंसान साथ में रहते हैं तो उनमें एक अद्भुत रिश्ता सा बन जाता है और पशु अपने मालिक को देख कर कुछ प्रतिक्रिया देने लगता है. बस मैंने इसी बात को यहां पर आजमाया और अस्तबल में सभी घोड़े एक ही तरह के खड़े करवा दिए ताकि कोई उन्हे देख कर पहचान न पाएं.

राजा ने भी अपना असली परिचय दिया. शहंशाह ने उस दूसरे व्यक्ति को काल कोठरी में डालने का आदेश दिया और उन्होंने राजा का खूब आदर सत्कार किया

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