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जहाँगीर का इतिहास – Jahangir History In Hindi

Jahangir History In Hindi

Jahangir History In Hindi

जहाँगीर चौथा मुग़ल शाशक था, जो भारत के प्रसिद्ध शाशको में से एक है। उसने 1605  से 1627, 22 साल तक  भारत पे राज किया।  वो ललित कला के प्रति अपने प्रेम के लिए भी प्रशिद्ध थे।  मुग़ल शाशक अकबर के सबसे बड़े पुत्र होने की वजह से उन्हें सार्वजनिक और सैनिक प्रशिक्षण दोनों का  बेहतरीन प्रशिक्षण दिए गया ।  समय के साथ वो बड़ा हुआ और सफल बनने के लिए अपने पिता के विरुद्ध 1599 में युद्ध किया, जिसमे वो हार  गया।  युद्ध के परिणाम स्वरुप जहाँगीर और अकबर का रिश्ता तनावपूर्ण हो गया, और अनेक इतिहासकारो ने सुझाव दिया की जहाँगीर को अकबर को मृत्यु तक कैदी बना लेना चाइये।  इसके बाद वो सिंघासन की और बढ़ा।  एक शाशक के रूप में उसने यह सिद्ध कर दिया की वो कुशल शाशक है , उसके राज्य में राजनैतिक स्थिरता और आर्थिक समृद्धि थी। उनकी ललित कला में भी रूचि थी और यूरोपियन और पारसी कला को बहुत संरक्षण दिया। जिसका मुग़ल कला की स्थापना में विशेष योगदान था।  अपने पिता से एक विराट विरासत मिलने के बाद, जहाँगीर ने अकबर के कई नियमो को अपनाया।

जहाँगीर का जन्म का नाम नूरुद्दीन मोहम्म्द था, इनका जन्म 31 अगस्त, 1569 को फतहेपुर सीकरी में हुआ था तथा उनकी राजपूत पत्नी का नाम मरियम -उल -ज़मानी बेगम था।

अकबर के सबसे बड़े जीवित पुत्र होने के कारन उन्हें सफलता बहुत जल्दी ही मिलने लगी।   अकबर ने  निश्चित किया की उन्हें सबसे अच्छी शिक्षा मिले।  उन्होंने पारसी, तुर्की, अरेबिक, हिंदी, गणित  और भूगोल की श्रेष्ठ शिक्षा प्राप्त की।  उन्होंने छंद लिखने की  शिक्षा भी प्राप्त की।

उनके हुनर को देख कर उन्हें 1585 में सेना का अधिकारी बनाया गया।

27 अक्टूबर, 1605 को अकबर का निधन हो  गया, 3 नवंबर , 1605 को जहाँगीर ने बादशाह का ताज पहन लिया।

जब उन्होंने ताज संभाला तब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता थी। वहाँ अनेक लोग ताज को पाने की  कोशिश कर रहे थे, उनके पुत्र ने भी उन्हें चुनोती दी।  जिसे हराकर जहाँगीर ने 1606 में अपने पुत्र को अंधा  करवाकर आगरा के किले में पाबंध कर दिया था।

जहाँगीर की रूचि ललित कला और संस्कृति में अधिक थी।  उसने अपने काल में कलाकारों और पेंटरो को प्रोत्साहन दिया, इसी के  कारण  मुगल कला की स्थापना हो सकी।  उसने यूरोपियन और पारसी कलाकारों को भी संरक्षण दिया। यह राजा अपने वास्तु कार्यो के लिए भी जाना जाता है, कश्मीर में शालीमार बाग़ का निर्माण भी इन्होंने ही करवाया था।

मुख्य कार्य – जहाँगीर के द्वारा आगरा में स्थापित की गयी न्याय की श्रखला मुख्या कार्य था। इसकी  श्रंखला  कई घंटियों से बंधी थी जिसे राजा को संदेसा देने के लिए काम में लिया जाता था ।  यह कार्य राजा और जनता के बीच सम्बन्ध स्थापित करने के लिहाज़ से बहुत अहम था।  इसे बजने वाले नागरिको की फरियाद राजा खुद सुनते थे।

निजी ज़िन्दगी– जहाँगीर की कई बार शादी हुई।  उनकी सबसे मशहूर पत्नी नूरजहाँ थी।  जोकि एक बागी  अधिकारी शेर अफ़ग़ान की विधवा थी।

जहाँगीर की मृत्यु बीमारी के कारण 7  नवम्बर, 1627  को हुई थी।  उनकी मृत्यु के समय वो कश्मीर से लाहौर जा रहे थे।  जहाँगीर का तिसरा पुत्र सबसे सफल रहा था जिसका नाम खुर्रम था।

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