आज सोचा जिंन्दा हुँ, तो घूम लूँ, मरने के बाद तो भटकना ही है…!


युं ही हम दिल को साफ़ रखा करते थे…पता नही था
की, ‘किमत चेहरों की होती है’


है दफ़न मुझमे कितनी रौनके मत पूछ ऐ दोस्त…..
हर बार उजड़ के भी बस्ता रहा वो शहर हूँ मैं!!



किसी ने यूँ ही पूछ लिया हमसे कि दर्द की कीमत क्या है;
हमने हँसते हुए कहा, “पता नहीं… कुछ अपने मुफ्त में दे जाते हैं।


आज हम हैं, कल हमारी यादें होंगी.
जब हम ना होंगे, तब हमारी बातें होंगी.
कभी पलटो गे जिंदगी के ये पन्ने,
तो शायद आप की आँखों से भी बरसातें होंगी



ये भी एक तमाशा है, इश्क और मोहब्बत में
दिल किसी का होता है और बस किसी का चलता है.

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मैं उस किताब का आख़िरी पन्ना था,
मैं ना होता तो कहानी ख़त्म न होती.


आदत बना ली मैंने खुद को तकलीफ देने की ,
ताकि जब कोई अपना तकलीफ दे तो ज्यादा तकलीफ ना हो !!


Tum to dur rahkar satate ho magar,
wo yaadein paas aakar rulaya karti hain


तुमको बहार समझ कर, जीना चाहता था उम्र
भर,भूल गया था की मौसम तो बदल जाते हैं.


खुदको मेरे दिल में ही छोड़ गई हो,
तुझे तो ठीक से बिछड़ना भी नहीं आया.



टूटे मक़ान वाला, दिल में ताजमहल रखता हूँ,
बात गहरी मगर अल्फ़ाज़ सरल रखता हूँ.