Maine samundar se sikha hai jeene ka salika,
Chupchap se behna aur apni mauj mein rehna.



निकाल दिया उसने हमें अपनी ज़िन्दगी से भीगे कागज़ की
तरह ना लिखने के काबिल छोड़ा ना जलने के
खामोशी के भी अपने अल्फाज़ होते हैं …
अगर तुम समझ जाते तो आज मेरे करीब होते।


चल हो गया फैसला कुछ कहना ही नहीं …
तू जी ले मेरे ‪बगैर‬ मुझे ‪जीना‬ ही नहीं..


सिर्फ़ अल्फ़ाज़ की ही बस बात थी…
जज़्बात तो वो वैसे भी नहीं समझते


उसको बेवफा कहकर अपनी ही नजर में गिर जाते है हम…..
वो प्यार भी अपना था और वो पसंद भी अपनी थी…


लाख चाहता हूँ कि तुझे याद ना करूँ..मगर…
इरादा अपनी जगह बेबसी अपनी जगह…

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बहुत सोचा, बहुत समझा, बहुत देर तक परखा,
तन्हा हो के जी लेना मोहब्बत से बेहतर है


बात कोई और होती तो हम कह भी देते…
कम्बखत मोहब्बत हे…बताया भी नहीं जाता…



मौहब्बत मुझे थी उनसे इतनी सनम यादों में दिल तड़पता रहा..
मौत भी मेरी चाहत को रोक न सकी कब्र में भी दिल धड़कता रहा !!


प्यार में मेरे सब्र का इम्तेहान तो देखो…
वो मेरी ही बाँहों में सो गए… किसी और के … लिए रोते रोते…


पागल नही थे हम जो तेरी हर बात मानते थे,
बस तेरी खुशी से ज्यादा कुछ अच्छा ही नहीँ लगता था…


Tum khush-kismat ho jo hum tumko chahte hain warna.
Hum to vo hai jinke khwabon mein bhi log izazat lekar aate hai.


बहुत लम्बी ख़ामोशी से ग़ुजरा हूँ मैं
किसी से कुछ कहने की तलाश में.